इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स ने इस हफ्ते के रिकॉर्ड होल्डर्स की घोषणा की

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यह कॉलम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स द्वारा देश के कोने-कोने के रिकॉर्ड होल्डर्स की कहानियों को सामने लाने का प्रयास है, ऐसी कहानियां जो आपके दिल में कुछ कर दिखने की आकांक्षा जगा दें।

इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स की मैनेजिंग एडिटर नीरजा रॉय चौधरी ने कहा कि, “हमें इस सप्ताह के रिकॉर्ड होल्डर्स की घोषणा करते हुए बेहद खुशी है, मुझे गर्व है कि हमारे देश में प्रतिभाशाली लोग है। 

ये है हफ्ते का टॉप-10 रिकॉर्ड होल्डर्स:

1) एक बार पेट्रोल डलवा कर स्कूटर से तय की गयी अधिकतम दूरी

बन्नी पुनिया (29 सितम्बर,1983 को जन्मे) ने अपनी “हीरो डेस्टिनी 125” स्कूटर से एक बार में 338.4 कि.मी की दूरी तय की। यह पश्चिम विहार, नई दिल्ली के रहने वाले है। इन्होनें अपनी यात्रा की शुरुवात सुबह 8.45 इंडियन ऑयल पेट्रोल पम्प, सेक्टर-18 नॉएडा से की और शाम 4.20 ताज यमुना एक्सप्रेसवे पर ख़त्म की। 

2) सुखी घांस से अधिकतम सामन बनाया

बिस्वरूप कर्माकर (13 अप्रैल, 1982 को जन्म) ने सुखी घांस से अधिकतम चीज़ें बनाने का रिकॉर्ड बनाया। यह बांकुरा, पश्चिम बंगाल के रहने वाले है। इन्होने सुखी घांस से 40 मूर्तियां और चित्र बनाये। इन्होने घांस को को एक कागज़ पर चिपकाया और फिर आकृति को कैंची से काट लिया। इन्होने नेताजी सुभाष चंद्र बोस, रबिन्द्रनाथ टैगोर, भगवान गणेश, सौरव गांगुली के 40 मूर्ति और चित्र बनाये।      

3) यंगेस्ट वर्ड मास्टर

प्रतीश पी ( 20 दिसंबर, 2017 को जन्मे) को केवल 3 साल और 6 महीने की उम्र में एक से दस तक की गिनती शब्दों में लिखने, 1 से 200 तक गिनती, राजधानियों के नाम और -Z छोटे अक्षर, तमिल अक्षर लिखने के लिए सम्मानित किया गया। 

4)  रेसिटेशन के लिए सराहना की गई

केरल के अलाप्पुझा की साइना शफीर (29 अगस्त, 2018 को जन्मी) को सिर्फ 2 साल और 9 महीने की उम्र में केरल के 14 जिलों, 18 राष्ट्रीय प्रतीकों, अंग्रेजी वर्णमाला, 1-20 की संख्या, इंद्रधनुष के रंग, 5 विपरीत शब्द, राष्ट्रगान का पाठ करने,  10 कार्टून चरित्रों की पहचानने के लिए सराहना की गयी। 

5)  घटम के मूल पाठों पर कौशल प्रदर्शित करने वाले सबसे छोटा बच्चा

वी मदनगोपालन ( 6 सितंबर, 2016 को जन्मे) ने केवल 4 साल और 10 महीने की उम्र में घटम के अल्पविकसित पाठों पर कौशल प्रदर्शित करने के सम्मानित किया गया। यह तमिलनाडु चेन्नई के रहने वाले है और श्री जय गणेश ताला वद्य विद्यालय में पढ़ते है।

6)  तेज़ बुद्धि

कर्नाटक के बेलगावी की अमायरा दाना (जन्म 18 जनवरी, 2019) को 20 जंगली जानवरों, 16 वाहनों, 3 सब्जियों, 10 खाद्य पदार्थों, 7 ट्रैफिक सिग्नल, 12 घरेलू जानवरों, 9 समुद्री जानवरों, 13 व्यवसायों, 3 खेलों,  4 फल, 9 पक्षी, शरीर के 23 अंग, 21 घरेलू उपकरण, 8 कीड़े, 5 संगीत यंत्र, 11 रंग, 20 क्रिया, अंग्रेजी वर्णमाला, 13 आकार और 8 ग्रहों के नामों का पाठ करने के लिए सराहा गया है।

7)  ऑडियो चैट एप्लिकेशन पर महिला सशक्तिकरण की सफलता की कहानियों का सबसे लंबा सत्र

ऑडियो चैट एप्लिकेशन ‘क्लबहाउस’ पर ‘महिला सशक्तिकरण सफलता की कहानियों’ के सबसे लंबे सत्र का आयोजन किया।  इस सत्र को आरटीएन एस सुंदर, संस्थापक और सीईओ, बिज़नेट सॉल्यूशन, कोयंबटूर, तमिलनाडु द्वारा संचालित किया गया। टीम ने 100 घंटे के सत्र की मेजबानी की, यह सत्र 10 जुलाई, 2021 को सुबह 10:12 पर शुरू हुआ और 14 जुलाई, 2021 को दोपहर 2:12 बजे समाप्त हुआ।

8)  दिल से सीखने के लिए सराहना की

सुक्रिती डी. (जन्म 20 जून, 2017) ने केवल  4  साल की उम्र में 15 बीजों, 10 रंगों, 15 पक्षियों, 34 जानवरों, 21 वाहनों, 15 बीजों, 21 फलों, 16 सब्जियों, 10 व्यवसायों, 10 खेल, सभी भारतीय राज्यों, 1-30 की संख्या, शब्दों के साथ अंग्रेजी और तमिल वर्णमाला, सप्ताह के दिनों, महीनों, 16 तुकबंदी का पाठ करना, और 60 जी.के. प्रश्नों के सवालों की पहचान के लिए सराहा गया है।  यह वेल्लोर तमिलनाडु की रहने वाली है।

9)  सिक्कों का पेड़ बनाना

दक्षिण अंडमान, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के एस. महेश्वरा (जन्म: 8 सितंबर, 2010) को सिक्कों का पेड़ बनाने के लिए सराहा गया। उन्होंने पेड़ बनाने के लिए 50 पैसे, 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये और 10 रुपये सहित सभी मूल्यवर्ग के सिक्कों का इस्तेमाल किया, जैसा कि 11 जून, 2021 को पुष्टि की गई थी।

10)  कोरोना महामारी के दौरान एक दिन में सबसे ज़्यादा लोगो ने रक्तदान किया 

कोरोना महामारी के दौरान एक दिन में 2,425 लोगों ने रक्तदान किया, यह रक्तदान शिविर हैदराबाद के एम एल ए मगंती गोपीनाथन, (जन्म: 2 जून, 1963) ने श्री कोटला विजया भास्कर रेड्डी स्टेडियम, यूसुफगुदा में आयोजित किया।  

इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स के बारे में: 2006 से, इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स निर्विवाद क्यूरेटर और भारतीय रिकॉर्ड्स का संरक्षक रहा है। हमारे लिए, यह केवल एक रिकॉर्ड दर्ज करने की प्रक्रिया नहीं है  बल्कि लोगों को ज़िन्दगी में कुछ असाधारण कर दिखने की प्रेरणा देते है।  आज इंडिया इंडिया बुक ऑफ़ रिकार्ड्स को 15 साल हो गए है और यह एक पहली ऐसी बुक है जो हर साल प्रकशित होती आ रही है।

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