इस मीडियम पेसर के आखिरी टेस्ट में थे पांच विकेट, लेकिन फिर कभी भारत के लिए नहीं खेला

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दौरे से पहले तक करियर में सिर्फ दो रणजी ट्रॉफी मैच खेलने वाले विवेक को एमआरएफ पेस अकादमी की प्रतिष्ठा के आधार पर भारतीय टीम में जगह दी गई थी. उन दिनों विवेक को अकादमी का बेस्ट बॉलर कहा जाता था. उनकी कद-काठी लंबी थी और वह अच्छी-खासी तेज गेंद फेंकते थे. बहरहाल,  सियालकोट में उनकी निकल पड़ी. 

नई दिल्लीः 12 जून 2020 : दौरे से पहले तक करियर में सिर्फ दो रणजी ट्रॉफी मैच खेलने वाले विवेक को एमआरएफ पेस अकादमी की प्रतिष्ठा के आधार पर भारतीय टीम में जगह दी गई थी. उन दिनों विवेक को अकादमी का बेस्ट बॉलर कहा जाता था. उनकी कद-काठी लंबी थी और वह अच्छी-खासी तेज गेंद फेंकते थे. बहरहाल,  सियालकोट में उनकी निकल पड़ी. 

यह साल 1989 का वही प्रसिद्ध दौरा था, जिसमें भारत के पाकिस्तान दौरे में सचिन तेंदुलकर, सलिल अंकोला और विवेक राजदान ने अपने टेस्ट करियर का आगाज किया था. विवेक को फैसलाबाद में दूसरे टेस्ट में खिलाया गया. भारत ने यहां एक ही पारी में गेंदबाजी की. और विवेक ने फेंके 13 ओवर, लेकिन उन्हें एक भी विकेट नहीं मिला. इसके बावजूद राजदान को सियालकोट के दूसरे टेस्ट में खिलाया गया. 

दौरे से पहले तक करियर में सिर्फ दो रणजी ट्रॉफी मैच खेलने वाले विवेक को एमआरएफ पेस अकादमी की प्रतिष्ठा के आधार पर भारतीय टीम में जगह दी गई थी. उन दिनों विवेक को अकादमी का बेस्ट बॉलर कहा जाता था. उनकी कद-काठी लंबी थी और वह अच्छी-खासी तेज गेंद फेंकते थे. बहरहाल,  सियालकोट में उनकी निकल पड़ी

सियालकोट में भी भारत को एक ही पारी में गेंदबाजी का मौका मिला. यहां राजदान ने 27 ओवर फेंके और रमीज राजा व सलीम मलिक जैसे दिग्गजों सहित सिर्फ पांच विकेट चटकाए. इस प्रदर्शन के बाद राजदान न्यूजीलैंड व श्रीलंका दौरे पर गए, लेकिन कभी भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट नहीं खेले. क्यों…क्या गलत गया..यह सिर्फ राजदान ही बेहतर बता सकते हैं, लेकिन एक बेहतरीन तेज गेंदबाज के करियर का दुखद अंत हो गया

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