डॉ. बिस्वरूप रॉय चौधरी ने क्लीनिकल डेथ से जुडी अपनी पुस्तक ‘द लास्ट 4 मिनट्स’ का किया विमोचन

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नई दिल्ली:  इंडो-वियतनाम मेडिकल बोर्ड द्वारा एलटीजी ऑडिटोरियम में एक विशेष पुस्तक लॉन्च का आयोजन किया गया, जिसमें देश भर के 200 से अधिक हेल्थकेयर प्रोफेशनल और लगभग 10,000 ऑनलाइन दर्शकों ने भाग लिया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ‘द लास्ट 4 मिनट्स’ नामक पुस्तक का विमोचन था।

लेखक डॉ. बिस्वरुप रॉय चौधरी, जो अपने क्रांतिकारी डीआईपी आहार के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने पुस्तक के विशेषता को समेटते हुए कहा, “जब एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो अवेयर 2 की स्टडी के मुताबिक, यह वास्तविक अर्थों में मृत्यु नहीं है। पहले दस मिनट बहुत ही महत्वपूर्ण होते हैं। यह अस्थायी मृत्यु होती है और इसे नाड़ी, श्वास और कोई गति नहीं होने पर मृत्यु के परिवर्तनकारी अनुभव के रूप में जाना जाता है। शरीर की कोशिकाएं तुरंत मृत नहीं होती हैं। कोशिकाओं को उनके लिए सभी प्रकार के भोजन उपलब्ध होते हैं-यह ऑक्सीजन या पोषण है। मस्तिष्क की कोशिकाएं चार मिनट तक जीवित रहती हैं, और इन मिनटों को ग्रे जोन के रूप में जाना जाता है। ग्रे ज़ोन अनिश्चित है। यह इन चार मिनटों में ही है; आपके पास एक जीवन वापस लाने का मौका होता है! “

डॉ. रॉय चौधरी; ‘सीपीआर’ कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन के रूप में जानी जाने वाली आमतौर पर निष्पादित प्रक्रिया की सीमाओं को उजागर करने का अवसर भी चिकित्सकीय रूप से मृत रोगियों पर और “कार्डिएक कंप्रेशन” नामक एक बेहतर और साक्ष्य-आधारित पद्धति से दर्शकों को प्रशिक्षित भी किया है।

यह आयोजन नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ होलिस्टिक हेल्थ (NIH) और फेडरेशन इंटरनेशनेल लॉ मेडिसिन एथिक्स एंड इनोवेशन (FILMEI) द्वारा सह-आयोजित किया गया था और डॉ. राजेश सी शाह भी इस कार्यक्रम में उपस्थिति रहे, जिन्हें मेडिको-लीगल साइंसेज के पिता के रूप में जाना जाता है। उन्होंने सर्वोत्तम परिणाम के लिए दवाओं की विभिन्न प्रणाली को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बहुत जोर दिया।

डॉ. राय चौधरी ने इस अवसर पर बताया कि उनके आहार-आधारित उपचार कैसे ठीक होते हैं और उन्होंने चिकित्सा व्यवसाय को बाधित कर दिया है साथ ही पैसा बनाने वाली दवा कंपनियों के लिए परेशानी का माहोल बना दिया है। जून 2020 तक वह विश्व के करीब लाखों लोगों को अपनी कोशिशों के जरिए ठीक कर चुके है। 

 डॉ. रॉय चौधरी ने अपने दृढ़ संकल्प को और मजबूत बना दिया है। अब वह सीधे अपने रोगियों और फ़ॉलोअरस तक पहुंचने के लिए, उन्होंने Coronakaal.tv.  के नाम से अपने नए ऐप को लॉन्च करने की घोषणा की है। इस एप्लिकेशन के माध्यम से, कोई भी आसान घरेलू उपचार और समाधान पा सकता है और चिकित्सा बिल पर लाखों खर्च किए बिना 60 से अधिक बीमारियों के लिए यह ऐप असरदार और लाभकारी है।

आप इस एप्लिकेशन सीधे लिंक www.biswaroop.com/app के माध्यम से डाउनलोड कर सकते है।

किताब के बारे में

‘द लास्ट 4 मिनट्स’, एक जीवनरक्षक पुस्तक है। यह बताता है कि जब कोई व्यक्ति मर जाता है, तो पहले दस मिनट महत्वपूर्ण होते हैं। यह अस्थायी मृत्यु होती है और इसे मृत्यु के रूपांतरण अनुभव के रूप में जाना जाता है। मस्तिष्क की कोशिकाएँ चार मिनट तक जीवित रहती हैं, और कोशिकाओं को सभी प्रकार के भोजन उपलब्ध होते हैं-यह ऑक्सीजन या पोषण होते है। इन चार मिनटों को ग्रे जोन के रूप में जाना जाता है। यह इन चार मिनटों में ही आपके पास एक जीवन वापस लाने का मौका है!

लेखक के बारे में

डॉ. बिश्वरूप रॉय चौधरी, पीएच.डी. मधुमेह में, क्रांतिकारी डीआईपी आहार के लिए जाने जाते है। उन्होंने 25 से ज्यादा किताबे लिखी व प्रकाशित की हैं एवं स्विट्जरलैंड, मलेशिया, वियतनाम और भारत समेत सभी देशों में केंद्र स्थापित किए हैं। वर्तमान में  श्रीधर विश्वविद्यालय, भारत के एक मानद बोर्ड सदस्य के रूप में सेवारत है।  डॉ. बिस्वरुप लिंकन यूनिवर्सिटी कॉलेज, मलेशिया के लिए चिकित्सा पोषण और आपातकालीन जीवन समर्थन पर प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाते हैं।

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