घरेलू हिंसा : मानवता पर अभिशाप

देश लाइफस्टाइल

नई दिल्ली, दीपिका देशवाल। जिस दिन से इंडिया में लॉकडाउन की घोषणा हुई है उस दिन से लेकर अब तक घरेलू हिंसा के मामले और दिनों की तुलना में दोगुना हो गए हैं। सिर्फ़ भारत में ही नहीं घरेलू हिंसा के मामले विदेशों में भी बढ़ रहे हैं। WHO के रीजनल डायरेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार भी पता चलता है कि यूरोप में पिछले साल की तुलना में 60 % घरेलू हिंसा के मामले बढ़े हैं । जबकि Hubei province  (heart of initial corona virus outbreak)  घरेलू हिंसा के मामले तीन गुना है। UNFP (UN agency for sexual and reproductive health) के अनुसार आने वाले छह महीनों के अंदर 30 मिलियन के क़रीब पूरे विश्व में घरेलू हिंसा के मामले होंगे अगर इसी तरीक़े से लॉकडाउन चलता रहा था तो।

घरेलू हिंसा केवल शारीरिक ही नहीं होती अपितु भावनात्मक, मानसिकता, कड़वे शब्द, ताना मारना,  अभद्र व्यवहार, गाली देना आदि सब हिंसा का ही रूप हैं। आमतौर पर महिलाएं घरेलू हिंसा अधिनियम-2005 से अनभिज्ञ हैं। यह क़ानून ऐसी महिलाओं को संरक्षण प्रदान करता है, जो परिवार के भीतर होने वाली किसी भी प्रकार की हिंसा से पीड़ित हैं। इसमें अपशब्द कहने, किसी प्रकार की रोक-टोक करने और मारपीट करना आदि शामिल हैं। घरेलू हिंसा में दोषी साबित होने पर 3 साल की सजा हो सकती है।

NHFS-4 National Family Health Survey released by Union Health Ministry की रिपोर्ट के अनुसार इंडिया में हर तीसरी लड़की घरेलू हिंसा का शिकार होती है 15 साल की उम्र से।जिसमें 31 % महिलाएँ अपने पतियों द्वारा शारीरिक पीड़ा , पिटाई का शिकार होते हैं। यह कितने शर्म की बात है कि आज के युग में भी महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार हो रही है ऐसे बुरे समय में जब पूरे देश में लॉक डाउन है कोरोना जैसी महामारी है ऐसे समय में सब को एक दूसरे का साथ देना चाहिए परंतु कुछ लोग निराश होकर अपना ग़ुस्सा महिलाओं पर निकालते हैं ऐसे घिनौने इंसान मानवता के लिए अभिशाप हैं।

तलाक  के लिए अर्जियां बढ़ गई हैं। लॉकडाउन में काफ़ी लोगों की जॉब हट गई है, बिज़नेस ठप हो चुका है, कामकाज कम हो गए हैं, महिलाओं पर और दिनों की तुलना में घर के काफ़ी कामकाज का बोझ अधिक हो गया है और जॉब वाली महिलाओं को डबल काम करना पड़ रहा है। जो घर से ही ऑफ़िस का काम संभाल रही है उनको घर का भी काम संभालना पड़ रहा है और ऑफ़िस का भी जिसके चलते परिवार में सब आपस में चिड़चिड़े हो गए हैं। परिवार में male ego के चलते पुरुष लोग महिलाओं का हाथ नहीं बँटवाते जबकि ऐसे समय में सब को मिल जुलकर हर काम में एक दूसरे की मदद करनी चाहिए आपस में प्यार से रहना चाहिए।

कई बार महिलाएँ भी क़ानून का ग़लत उपयोग कर लेती है वो भी बिलकुल ग़लत है झूठी कंप्लेंट न करें क्योंकि कुछ झूठी कंप्लेन की वजह से जो बड़ी मात्रा में असली में जो महिलाएँ घरेलू हिंसा का शिकार होती है उनको बहुत कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

कर्फ्यू व तालाबंदी शुरू होने से अब तक महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा की शिकायतों में भारी वृद्धि को देखते हुए पुलिस ने ऐसे मामलों से निपटने की विस्तृत रणनीति तैयार की है। इसके तहत डीएसपी को महिलाओं के विरुद्ध अपराध के संबंध में की जा रही कार्रवाई की डेली रिपोर्ट पेश करनी होगी। पंजाब मे महिलाओं के विरुद्ध अपराध में 21 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

इस वृद्धि दर से निपटने के लिए पंजाब डीजीपी ने सीएडब्ल्यू सेल के सभी डीएसपी और महिला हेल्प डेस्क के अधिकारियों के साथ एक वीडियो कॉन्फ्रेंस की।

काफ़ी महिलाओं ने मुझसे संपर्क किया जो घरेलू हिंसा का शिकार थी मैंने तुरंत उस पे कार्रवाई की और पुलिस सहायता प्रदान कराई और उनका मामला दर्ज किया गया।इसके साथ साथ कई लोगों की काउंसलिंग  की है जो अब ठीक ठाक प्यार से रह रहे हैं।

पुलिस, हाई कोर्ट , सुप्रीम कोर्ट, लॉ ऑफिसर, जजों, सभी की आपस ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग हुई जिसमें घरेलू हिंसा का मुद्दा विस्तृत विस्तृत रूप से चर्चित हुआ और मीटिंग में फैसला किया गया है कि ऐसी सभी शिकायतों का पता लगाने और की गई कार्रवाई की निगरानी करने के लिए डीएसपी एक निर्धारित फॉर्मेट में रोजाना रिपोर्ट भेजेंगे। जरूरत पड़ने पर पुलिस सेंटरों से तालमेल करेगी। जिनका प्रबंधन सामाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा नामांकित किए गए काउंसलरों द्वारा किया जाता है।

भारत में पंजाब के अलावा उत्तराखंड ,दिल्ली, हरियाणा में भी घरेलू हिंसा के काफ़ी मामले बढ़े हैं तभी सुप्रीम  कोर्ट द्वारा भी निर्देश दिए गए हैं ताकि समय पर महिलाओं को बच्चों को न्याय मिले।

अगर आप के साथ घरेलू हिंसा हो रही है या आपके आस पास हो रही है तो आप तुरंत पुलिस को सूचित करें वो महिला हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें और अपने आस पास या फ्रेंड सर्कल में ध्यान दें उनको मानसिक रूप से स्पोर्ट करें।

और महिलाएँ इस बात पर भी ध्यान दें कि अगर आप इसी तरीक़े से साथ ही रहेंगी तो सहने वाला ज़्यादा ग़लत होता है और आप का आज ख़ुद के लिए न्याय के लिए खड़ा होना आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उद्धारण रहेगा और उनके साथ भी कभी दुर्व्यवहार नहीं हो पाएगा।

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